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सूर्यदेव और प्रकृति की उपासना का एकमात्र पावन महापर्व, जहाँ अस्ताचलगामी और उदीयमान दोनों सूर्यों को संपूर्ण श्रद्धा से अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
छठ महापर्व की महिमा, सूर्यदेव व छठी मइया के प्रति अगाध श्रद्धा और लोक आस्था का पावन लोकगीत।...
पवन सिंह द्वारा स्वरबद्ध यह छठ गीत व्रती महिलाओं द्वारा गंगा घाट पर जोड़े-जोड़े फल, सूप, दउरा व पीयर...
अनुराधा पौडवाल द्वारा स्वरबद्ध यह कालजयी छठ गीत प्रातःकालीन उषा अर्घ्य के पावन क्षण का वर्णन करता है...
पद्म भूषण शारदा सिन्हा जी द्वारा स्वरबद्ध यह कालजयी मैथिली छठ गीत सूर्यदेव (दीनानाथ) के स्वर्णिम सात...
छठ पूजा के सूप और डाला में भगवान सूर्य व छठी मइया को अर्पित करने वाले फलों (केला, नारियल, शरीफा, सेब...
पद्म भूषण शारदा सिन्हा जी द्वारा स्वरबद्ध 'हो दीनानाथ' छठ महापर्व का सबसे प्रतिष्ठित व भावपूर्ण पारं...
अनुराधा पौडवाल द्वारा स्वरबद्ध यह अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक छठ गीत बांस की बहंगी में पूजा-प्रसाद लेकर...
अनुराधा पौडवाल जी द्वारा स्वरबद्ध 'मारबो रे सुगवा धनुख से / नारियरवा जे फरेला धवद से' छठ महापर्व का ...
कल्पना पटवारी द्वारा स्वरबद्ध 'उगी हे दीनानाथ (कलपेली भीजल तिवइया)' उषा अर्घ्य के पावन और कठिन क्षणो...
कल्पना पटवारी द्वारा स्वरबद्ध 'दर्शन देखाई दीही / उगी उगी हे आदित मोला' छठ महापर्व के उषा अर्घ्य का ...
लोकगायिका देवी द्वारा स्वरबद्ध 'कांच ही बांस के बहंगिया' छठ महापर्व का सर्वकालिक लोकप्रिय व हृदयस्पर...
लोकगायिका देवी द्वारा स्वरबद्ध 'कोपि कोपि बोलेली छठिया मइया' छठ महापर्व का अत्यंत प्रिय और पारंपरिक ...
प्रथम दिवस: नहाय-खाय (कद्दू-भात का सात्विक प्रसाद) • द्वितीय दिवस: खरना (गुड़ की खीर व निर्जला व्रत आरंभ) • तृतीय दिवस: संध्या अर्घ्य (अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य) • चतुर्थ दिवस: उषा अर्घ्य व पारण (उदीयमान सूर्य को अर्घ्य व व्रत संपन्न)।